


一 | 近年来,部分县域坚持生态优先、绿色发展,立足资源禀赋、主体功能定位和产业基础,积极探索生态资源价值实现路径,在筑牢生态安全底线基础上释放生态资源潜能,逐步形成生态保护赋能、生态产业转化、产业绿色转型、制度机制创新四条路径,为不同类型县域拓宽生态价值转换路径提供了有益实践。县域生态价值转化的四条路径生态保护赋能,以系统治理夯实价值转化根基。 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभक्ति जगाने का काम जो संघ में कर रहे हैं, वह सारे समाज में हो। ऐसा बहुत लोग बिना किसी लाभ के कर रहे हैं। धर्म को जीने वाले गांव-गांव, शहरों की झुग्गी-झोपडि़यों में भी मिलेंगे। यह सारा जो भारत का बल है, बिखरा है। उसे एक रचना में बांधना है। कोई व्यक्ति, कुटुंब अछूता न रहे. ऐसा कार्य विस्तार करना पड़ेगा।,एक-एक गांव, एक-एक गली, एक-एक घर तक। समाज के सब वर्गों में, सब स्तरों तक। ऐसे संगठन का जाल उत्पन्न करना पहला काम है। यह सज्ज्न शक्ति जो बिखरी पड़ी है, उनको संपर्कित करना। उन्हें संघ में नहीं लाना, सिर्फ नेटवर्किंग बनाना है।,हम प्रयास करेंगे कि समाज के ऐसे सभी गर्वों को चलाने वाले, आपेनियियम मेकर में परस्पर नित्य संबंध बना रहे। वह अपने संबंधित वर्ग की उन्नति के लिए काम करें। लेकिन साथ ही यह अहसास हो कि हम इस समाज के अंग हैं। यह समाज रहेगा तो हमारा अस्तित्व रहेगा। सब लोग मिलकर काम करेंगे तो समस्या का निरसन और अभाव की पूर्ति कैसे हो, तय कर सकेंगे।,कोई दुर्बल वर्ग है तो उसकी मदद करें। यह समाज के स्वभाव में आ जाए, सहज स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाए, इसका प्रयास हम लोग करेंगे। भारत के अधिकांश पड़ोसी देश पहले कभी भारत ही थे। लोग वही हैं, भूगोल, नदियां, जंगल वही है। बस नक्शे पर रेखाएं खींची गई हैं।,पहला कर्तव्य है कि ये जो अपने ही हैं, वह अपनत्व की भावना से जुड़ जाएं। देश अलग-अलग रहेंगे, लेकिन विरासत में मिले मूल्यों के आधार पर इन सभी की प्रगति हो। सबसे बड़ा भारत है, इसलिए उसको काम करना होगा। इससे जो संबंध बनेंगे, वह विश्व के लिए उपकारक होंगे। उस दृष्टि से क्या करना होगा, इस पर स्वयंसेवक विचार कर रहे हैं।,हमारा विचार है कि संगठित विचारशक्ति के आधार के समाज का परिवर्तन हो। बदलाव लाने वाले कुछ काम हमने शुरू किए हैं। अब हम स्वयंसेवकों के घरों के आधार पर अड़ोस-पड़ोस के समाज को उसमें सहभागी करना चाहते हैं। उन पांच कामों को हम पंच परिवर्तन कहते हैं। सामाजिक पापों, संस्कारहीनता, संबंधों की अज्ञानता के कारण जो होता है, उसको ठीक करने के लिए कुटुम्ब प्रबोधन। विशेषकर नई पीढ़ी का माइंडसेट इंडीविज्यूल बनता जा रहा है।,पहला, परिवार के सभी सदस्यों को सप्ताह में एक बार साथ बैठना चाहिए। भजन करें, भोजन करें, आपस में गपशप करें। बच्चे इस चर्चा में प्रश्न पूछेंगे, इसलिए अपनी तैयारी रखें। तीसरी बात है कि मैं और मेरा परिवार जिस समाज व राष्ट्र के कारण हैं, उसके लिए क्या कर सकते हैं, इस पर विचार करें। जब ऐसे काम बच्चे करने लेंगे तो संबंधों का महत्व समझ आएगा। दूसरा है पर्यावरण। नीतिगत बातें बदलने में बहुत समय लगेगा।,लेकिन अपने जीवन में बदलाव के लिए छोटे काम कर सकते हैं। जैसे कि पानी बचाओ, ¨सगल यूज प्लास्टिक हटाओ और पेड़ लगाओ। तीसरा सामाजिक समरसता है। यह करने में कठिन है, लेकिन करनी ही होगी। विषमता मनुष्य के मन में है। इसको मन से जाना चाहिए। इसके लिए कुछ व्यवहार करना पड़ेगा। जिस इलाके में हम रहते हैँ, आते-जाते हैँ, वहां अपने व्यक्तगत मित्र होने चाहिए। कुटुम्ब में मित्रता होनी चाहिए।,आज शुरू करो, तीन-चार साल में सब बन जाएगा। सबको करना पड़ेगा। जिस तरह मंदिर, पानी, श्मशान में कोई भेद नहीं होता। चौथा आत्मनिर्भरता है। इसे अपने घर से शुरू करें। जब स्वदेशी की बात करते हैं तो लगता है कि विदेशों से संबंध नहीं रहेंगे। ऐसा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार तो होगा, लेकिन इसमें दबाव नहीं, स्वेच्छा होना चाहिए। इसलिए स्वदेशी का पालन करना है। अपने घर की चौखट के अंदर अपनी भाषा और अपनी वेशभूषा चाहिए।,भाषा, भूषा, भजन, भोजन अपने घर के अंदर अपना, अपनी परंपरा का चाहिए। जहां आवश्यक है, अपनी भाषा के शब्द प्रयोग करो।पांचवां है हर हालत में संविधान, नियम, कानून का पालन करके चलना। कोई भड़काऊ बात हो गई तो भी कानून हाथ में नहीं लेना। थोड़ा सा आंदोलन करना पड़े तो करो। उपद्रवकारी लोग इसका लाभ लेते हैं, हमको तोड़ते हैं। अपना बिल समय पर भरें, लाइसेंस आदि समय पर नवीनीकृत कराएं। दैनिक जीवन में यही देशभक्ति है।,आज देश के लिए चौबीस घंटे जीने की आवश्यकता है। इसी तरह छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना होगा। यह सोचें कि मुझसे, मेरे घर से शुरू होगा तो देश में जाएगा, तब दुनिया को भारत में दिखेगा। इन सभी पर विचार चल रहा है। निर्णय प्रतिनिधि सभा में होना है, लेकिन इनमें से पंच परिर्वतन तो होना ही होना है। दुनिया अपनेपन से चलती है, सौदे से नहीं चल सकती। यह करना है तो इक्के-दुक्के का काम नहीं, एक पूरा राष्ट्र इसमें लगना चाहिए।,सृष्टि में विविधता है, परस्पर विरोध भी है। लेकिन यह विविधता एकता का ही आविष्कार है, लेकिन सबको, मानना और संभाल कर चलना, सब सुखी हों। हमारी विचारधारा में यही है। अपने देश में परंपरागत रूप से ही इतने वर्ग हैं। बाहर से भी वर्ग आए हैं, विशेष कर धार्मिक वर्ग है। बाहर से आक्रमण के नाते विचारधाराएं आईं, लेकिन किसी कारण उनको जिन्होंने स्वीकार किया, वह तो यहीं के हैं और आज यहीं हैं। भले ही विचारधारा विदेशी रहे, लेकिन हिंदू विचार तो वसुधैध कुटुम्बकम है। हर विचार को अच्छा मानता है।,जो दूरियां बनी हैं, उन्हें पाटने के लिए दोनों तरफ से कुछ करने की आवश्यकता है। वह होने के लिए संवाद बने, परस्पर अविश्वास को पाटकर निशंक होकर सब एक राष्ट्र के अंग के नाते अपनी विविधता के बावजूद आगे बढ़ें। उसके लिए भी हम संभल-संभल कर कदम बढ़ाने की बात कर रहे हैं। ऐसा विचार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रतिमान बन रहे हैं, लेकिन उसके आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा चिंतन बनाना है। मनुष्य को धर्म के लिए त्याग करना होता है और धर्म की रक्षा करने से सबकी रक्षा होती है।,विविधता को समाप्त किए बिना चलती है। विश्व इसे भूल गया है। 300-350 वर्षों के पहले से जो धीरे-धीरे जड़वाद और व्यक्तिवाद अति पर पहुंच गया। इससे बने जीवन में भद्रता, संस्कार नहीं रहा। आज विश्व के देशों में यही स्थिति है। दुनिया में अशांति और कलह है, कट्टरपन बढ़ गया है। जीवन में किसी प्रकार की भद्रता, किसी प्रकार का संस्कार न हो, ऐसी इच्छा रखने वाले लोग वो इस कट्टरता का प्रचार करते हैं। यह बहुत संकट है सभी देशों पर, अगली पीढ़ी पर।,अधूरी दृष्टि से चल रही दुनिया को 180 डिग्री से अपने आउटलुक को बदलना होगा। वह आउटलुक है धर्म। धर्म रिलीजन नहीं है, पूजा-पाठ, खानपान से परे है। रिलीजन आन द टाप आफ रिलीजन है धर्म। उसमें विविधता का स्वीकार्य है। धर्म संतुलन सिखाता है। वह किसी अतिवाद पर नहीं जाने देता। अपने जीवन को धार्मिक जीवन बनाकर सारी दुनिया को देने की आवयकता है। आज की दुनिया संबंधों को तरस रही है। धर्म विश्व की इन समस्याओं का समाधान देता है।,शांति, पर्यावरण, उदारता को धर्म ²ष्टि को जानना पड़ेगा। धर्म यूनिवर्सल है, जैसे कि गुरुत्वाकर्षण। इसलिए यह विश्व धर्म है। इसे दुनिया को देने के लिए हिंदू समाज संगठित होना होगा। इसका मतलब धर्मांतरण नहीं है, धर्म में कन्वर्जन नहीं होता। भारतवर्ष की लाइफ मिशन ऐसा माडल खड़ा करना है, जिसका अनुकरण विश्व कर सके। व्यक्ति जीवन से लेकर पर्यावरण तक कैसा रास्ता हो, यह दिखाने के लिए भारत के समाज को अपना उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। यह विचार संघ में पहले से था, लेकिन कोई सुनता नहीं। आज भारत की और संघ की स्थिति है कि पूरा समाज सुनता है।आज सभी बारी-बारी से आकर संघ को देखिए, संघ को समझिए।。以山水林田湖草沙一体化保护和系统治理为核心,通过生态修复改善生态环境质量、提升生态系统服务功能,为生态补偿、碳汇开发和生态产业发展创造条件,形成“保护生态—提升价值—反哺保护”的良性循环。该路径主要适用于国家重点生态功能区、水源涵养区、自然保护地以及生态脆弱修复区等区域的县域。山西沁水县持续实施国土绿化、沁河流域生态修复、天然林保护等工程,统筹推进森林、河流、湿地等生态系统保护修复,在提升生态本底的基础上发展生态观光、森林研学、林下种养等绿色业态,推动生态治理成果向产业发展和群众增收转化。陕西留坝县编制生物多样性保护专项规划,实施重点保护项目,建立多部门协同管护机制,加强珍稀动植物栖息地保护修复,在筑牢秦岭生态安全屏障的同时,发展林下经济、生态康养等产业,推动生态保护优势转化为绿色发展优势。生态产业转化,以资源开发拓展价值增值空间。立足优质生态禀赋和特色资源优势,重点发展生态农业、林下经济、生态旅游、森林康养等绿色产业,延伸精深加工、休闲体验、文化创意等价值链条,促进生态资源向生态产品、生态产品向生态产业、生态产业向生态价值、生态价值向经济价值转化,实现生态增值、产业增效、群众增收。

二 | 该路径主要适用于生态本底优良、特色农林资源富集、生态文旅发展潜力较大的县域。吉林抚松县地处长白山核心生态功能区,深耕人参、蓝莓等特色林下种养产业,推动初级农产品向保健品、精深食品等高附加值环节延伸,联动森林康养、冰雪度假等文旅业态,构建“种养—加工—文旅”全链条价值转化体系,持续将生态资源优势转化为产业发展优势。河北兴隆县依托燕山生态资源和板栗、山楂等特色林果资源,推进标准化种植、精深加工和品牌化运营,培育生态观光、森林康养、乡村民宿等特色业态,推动生态资源向特色产业、生态产品向产业价值转化,实现生态增值与群众增收协同发展。产业绿色转型,以低碳升级释放产业生态价值。以绿色、低碳、循环发展为导向,以节能降碳、清洁生产、资源循环利用为抓手,推进重点行业、园区和企业绿色化改造,推动产业链、供应链和能源体系绿色升级,培育绿色制造、新能源、节能环保等产业,实现资源高效利用、产业提质增效与生态环境改善协同共进。

三 | 该路径主要适用于工业基础较好、资源型产业占比较高的县域。

四 | 安徽宁国市立足制造业基础,围绕汽车零部件、耐磨材料等产业推进节能降碳、清洁生产和园区循环化改造,提升资源利用效率,培育节能环保、新能源装备等绿色产业,推动传统制造业绿色升级。山东龙口市聚焦高端铝材料、汽车零部件等优势产业,实施产业链绿色改造,完善固废资源化利用、水资源循环利用体系,布局海上风电、海洋新能源装备等绿色产业,加快工业体系低碳转型。制度机制创新,以改革探索畅通价值实现通道。

五 | 以制度创新为突破口,通过搭建政府引导、市场运作的生态资源运营平台,健全价值核算、确权登记、收储运营、交易流转等机制,推动生态资源资产化、资本化,畅通生态价值实现通道,破解生态资源“难度量、难确权、难交易、难变现”等难点堵点。该路径主要适用于改革基础较好、生态产品价值实现条件较为成熟的县域。

六 | 青海祁连县立足祁连山生态安全屏障定位,以生态产品价值实现机制试点为抓手,聚焦核算筑基、交易赋能、补偿激励等关键环节,完善资源确权、价值核算、生态补偿、网格管护等制度体系,探索草原碳汇、生态资产交易等市场化转化路径,为青藏高原生态脆弱地区探索生态价值转化路径提供了实践样板。江西资溪县创新“两山银行”运营模式,对山林、水域、古村落等分散生态资源统一收储、整合运营,通过租赁、入股、招商等方式开展市场化开发,推动碎片化生态资源向规模化经营性资产转化,探索形成生态资源市场化运营和价值实现的有效路径。县域生态价值转化的五项举措县域促进生态价值高效转化,必须坚持生态优先、绿色发展,立足禀赋、因地制宜,统筹高水平保护与高质量发展。通过夯实生态基底、推动产绿融合、深化机制改革、汇聚多方合力,打通生态保护、产业升级、价值变现、富民增收全链条,切实将生态资源优势转化为县域绿色发展和富民增收优势。

七 | 坚持因地制宜,分类施策,找准生态价值转化突破口。全面摸清生态资源底数,建立资源、价值、项目“三张清单”,优先布局生态效益好、市场前景广、带动能力强的绿色项目。生态功能突出县域重点加强生态保护和生态产品供给,积极争取生态补偿,稳妥发展碳汇、生态农业和生态旅游;农业主导县域突出特色生态农产品培育,推进精深加工和品牌营销;工业基础较好县域聚焦产业绿色转型,推进园区循环化改造和企业绿色技改。坚持生态优先、系统治理,筑牢价值转换生态基础。

八 | 把生态保护修复作为生态价值转化的前提和基础,统筹推进山水林田湖草沙一体化保护和系统治理,严格落实生态保护红线等管控要求。聚焦重点流域、森林湿地、矿山和生物多样性重点区域,实施生态保护修复、森林质量提升等重点工程,持续提升生态系统质量和服务功能,增强优质生态产品供给能力,为生态价值转化和绿色产业发展夯实基础。坚持“两化”协同、融合发展,拓展生态价值实现载体。

九 | 推动生态产业化与产业生态化协同发力,做强特色农林、林下经济、生态文旅、森林康养等产业,推动生态产品规模化生产、标准化认证、品牌化运营和市场化营销,完善产销配套体系,畅通价值增值链条。推进重点行业、园区和企业节能降碳、清洁生产、资源循环利用和绿色技术改造,发展循环经济和绿色供应链,推动传统产业绿色升级。

十 | 坚持改革赋能、数据驱动,激发价值转化内生动力。

十一 | 深化生态产品价值实现机制改革,健全自然资源统一确权登记、生态产品价值核算、生态资源收储运营等制度,积极探索GEP核算、绿色金融、生态补偿、林业碳汇等改革路径。强化人工智能、大数据、遥感监测等数字技术应用,提升生态资源调查、生态环境监测、生态资产管理和生态价值评估数字化水平,推动生态资源由“可感知”向“可计量”、由“可计量”向“可交易”转变。坚持协同联动、多元参与,凝聚生态价值转换合力。加强生态价值转化与乡村全面振兴、新型城镇化等重大战略衔接,完善财政、金融、土地、人才、科技等要素保障机制,健全跨区域生态保护协作和生态文明建设考核评价机制。发挥国家生态文明建设示范区、“两山”实践创新基地等平台载体示范作用,构建政府引导、市场运作、社会参与的生态治理体系,完善利益联结和成果共享机制,推动生态保护成果更多更公平惠及人民群众。
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Published on:04:28:29